
विदर्भ स्पेशल घोळीची भाजी रेसिपी इन हिंदी :
विदर्भ की रसोई अपने अनोखे और पारंपरिक स्वाद के लिए पूरे महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है। यहां की कई ऐसी पारंपरिक रेसिपी हैं जो पीढ़ियों से बनाई जाती रही हैं और आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं। उन्हीं में से एक है घोळीची भाजी। यह एक साधारण लेकिन बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक पारंपरिक सब्जी है जिसे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े चाव से बनाया जाता है।
घोळीची भाजी अपने देसी स्वाद, कम मसालों और पौष्टिक गुणों के कारण बहुत पसंद की जाती है। इसे गर्म ज्वारी की भाकरी, बाजरे की रोटी या गेहूं की चपाती के साथ परोसा जाता है। यदि आप अपने ब्लॉग के लिए एक पारंपरिक और अनोखी रेसिपी की तलाश में हैं, तो यह रेसिपी आपके पाठकों को जरूर पसंद आएगी।

विदर्भ स्पेशल घोळीची भाजी रेसिपी सामग्री :
500 ग्राम घोळी की पत्तियां (Gholi Leaves)
2 मध्यम आकार के प्याज बारीक कटे हुए (Onion)
8 से 10 लहसुन की कलियां (Garlic)
3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई (Green Chilli)
चने की दाल 1/2 कटोरी तूर दाल 1/2 कटोरी
2 बड़े चम्मच तेल (Oil)
1 छोटा चम्मच राई (Mustard Seeds)
1/2 छोटा चम्मच जीरा (Cumin Seeds)
1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर (Turmeric Powder)
1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder)
स्वादानुसार नमक (Salt)
आवश्यकतानुसार पानी
घोळीची भाजी बनाने की तैयारी :
सबसे पहले घोळी की पत्तियों को अच्छी तरह धो लें।
पत्तियों को बारीक काट लें।
बाद में चने की दाल तूर दाल तोले और उसमें कटी हुई सब्जी डालकर कुकर में दो-तीन सिटी कर ले
प्याज, लहसुन और हरी मिर्च को बारीक काट लें।
सभी सामग्री को पहले से तैयार रखने से सब्जी जल्दी और आसानी से बन जाती है।
घोळीची भाजी बनाने की विधि :
1 दाल दाल दालतैयार करना
सबसे पहले चना दाल और तूर दाल को अच्छी तरह धोकर लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगो दें।
- कुकर में सामग्री डालें
प्रेशर कुकर में भीगी हुई दाल, कटी हुई घोळी की पत्तियां, हल्दी और लगभग 2 कप पानी डालें।
अब इसे 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं ताकि दाल और पत्तियां अच्छी तरह गल जाएं। - दाल और भाजी को मिलाएं
कुकर का प्रेशर निकलने के बाद दाल और भाजी को हल्का सा मैश कर लें। पूरी तरह पेस्ट न बनाएं, थोड़ा दानेदार स्वाद अच्छा लगता है। - तड़का तैयार करें
एक कड़ाही में तेल गरम करें।
अब इसमें राई डालें। राई चटकने लगे तो जीरा डालें।
इसके बाद बारीक कटा हुआ लहसुन और हरी मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें।
अब प्याज डालकर हल्का गुलाबी होने तक पकाएं। - मसाले डालें
प्याज पकने के बाद लाल मिर्च पाउडर डालें और तुरंत दाल और घोळी का मिश्रण इसमें मिला दें। - उबाल आने दें
स्वादानुसार नमक डालें और 5-7 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं।
यदि सब्जी ज्यादा गाढ़ी लगे तो थोड़ा गर्म पानी डाल सकते हैं। - परोसें
ऊपर से हरा धनिया डालकर गरमा-गरम परोसें।

परोसने के लिए सबसे अच्छे विकल्प :
ज्वारी की भाकरी
बाजरे की भाकरी
गेहूं की रोटी
लहसुन की चटनी
हरी मिर्च का ठेचा
प्याज और छाछ
विदर्भी स्वाद के लिए खास टिप :
विदर्भ में कई घरों में इस भाजी में अंत में थोड़ी सी मूंगफली का कूट या एक चम्मच घर का बना काला मसाला भी डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है। और आपको अगर पसंद हो तो आप उसमें इमली की कुछ टुकड़े भी डाल सकते हैं उसे खट्टा मीठा स्वाद आता है और सब्जी और भी स्वादिष्ट बन जाती हैयह वही देसी शैली की घोळीची भाजी है जो दाल के साथ बनाई जाती है और जिसकी बनावट पातळ भाजी या ग्रामीण विदर्भ की पारंपरिक दाल वाली सब्जी जैसी होती है।
पोषण तत्व (Nutrition Information)
पोषक तत्व :
कैलोरी 120-140
प्रोटीन 4 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 10 ग्राम
वसा 7 ग्राम
फाइबर 5 ग्राम
आयरन अच्छी मात्रा में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में
स्वास्थ्य लाभ :
- आयरन से भरपूर
घोळी की पत्तियां आयरन का अच्छा स्रोत होती हैं जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करती हैं। - पाचन के लिए लाभदायक
इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है
हरी पत्तेदार सब्जियों में मौजूद विटामिन और मिनरल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। - वजन नियंत्रित रखने में मददगार
कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने में सहायक होती है। - हड्डियों के लिए फायदेमंद
इसमें कैल्शियम और अन्य खनिज पाए जाते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
आवश्यक टिप्स :
हमेशा ताजी और कोमल पत्तियों का उपयोग करें।
मूंगफली का उपयोग करने से भाजी का स्वाद बढ़ जाता है।
ज्यादा पानी न डालें, इससे भाजी का स्वाद कम हो सकता है।
धीमी आंच पर पकाने से असली विदर्भी स्वाद आता है।
यदि तीखा पसंद हो तो हरी मिर्च की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
आम गलतियां जो लोग करते हैं :
- पत्तियों को ठीक से साफ न करना
हरी पत्तियों में मिट्टी हो सकती है, इसलिए इन्हें अच्छी तरह धोना जरूरी है। - ज्यादा पानी डाल देना
अधिक पानी डालने से भाजी का स्वाद और बनावट दोनों खराब हो सकते हैं। - तेज आंच पर पकाना
तेज आंच पर पकाने से पत्तियां जल्दी जल सकती हैं।
निष्कर्ष :
विदर्भ स्पेशल घोळीची भाजी एक ऐसी पारंपरिक रेसिपी है जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का बेहतरीन संतुलन प्रदान करती है। कम मसालों में बनने वाली यह देसी भाजी आज भी ग्रामीण महाराष्ट्र की पहचान मानी जाती है। ज्वारी की भाकरी और लहसुन की चटनी के साथ इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।
यदि आप अपने ब्लॉग पर पारंपरिक और क्षेत्रीय व्यंजनों को शामिल करना चाहते हैं, तो घोळीची भाजी एक शानदार विकल्प हो सकती है। इसकी सरल विधि, पौष्टिक गुण और देसी स्वाद आपके पाठकों को अवश्य पसंद आएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :
क्या घोळीची भाजी को पहले से बनाकर रखा जा सकता है?
हाँ, इसे 1 दिन तक फ्रिज में सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्या इसमें मूंगफली डालना जरूरी है?
नहीं, लेकिन मूंगफली डालने से पारंपरिक स्वाद मिलता है।
क्या इसमें इमली या खट्टेपन के लिए आम डालना जरूरी है
नहीं पर इमली या आम डालने से सब्जी का स्वाद ज्यादा बढ़ जाता है
क्या इसे बच्चों को खिलाया जा सकता है?
हाँ, कम मिर्च डालकर इसे बच्चों को भी दिया जा सकता है।
क्या यह वजन कम करने वालों के लिए अच्छी है?
हाँ, इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है।
क्या इसमें अदरक लहसुन डालना जरूरी है
नहीं जो लोग अदरक लहसुन नहीं खाते वह मत डाले पर अदरक लहसुन से सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है